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2 करोड़ किसानों का एक लाख तक कर्ज किया माफ

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुई पहली कैबिनेट बैठक नवमी के मौके पर हुई है और सरकार ने इस बैठक में नौ फैसले लिए। यह जानकारी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दी है। लखनऊ के लोकभवन में हुई यह बैठक डेढ़ घंटे चली। इस बैठक में सीएम आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य के अलावा तमाम मंत्री शामिल हुए।
किसानों का 36359 करोड़ का कर्ज माफ
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के दो करोड से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली कर्ज माफ करने का महत्वपूर्ण फैसला किया। इस फैसले से प्रदेश के राजकोष पर 36359 करोड रुपये का बोझ आएगा। कैबिनेट की पहली बैठक में राज्य के किसानों के हित में ये बडा फैसला किया गया जो विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में प्रमुख मुद्दा था।
दो करोड 30 लाख किसानों का कर्ज माफ
कैबिनेट बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, यह हमारे संकल्प पत्र का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी चुनाव के दौरान ऐलान किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में ही लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। सिंह ने कहा कि लघु एवं सीमांत किसानों के विषय में जो महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट ने किया है, वह फसली ऋण से संबंधित है। गत वर्ष सूखा पडा, ओलावृष्टि हुई और बाढ आयी जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश में लगभग दो करोड 30 लाख किसान हैं, जिनमें से 92.5 प्रतिशत यानी 2.15 करोड लघु एवं सीमांत किसान हैं।
किसानों का 30,729 करोड़ का कर्ज माफ
उन्होंने कहा, उनका ऋण माफ किया गया है। कुल 30,729 करोड रुपये का कर्ज माफ किया गया है क्योंकि ये किसान बडा ऋण नहीं लेते इसी अंदाज से एक लाख रूपये तक का ऋण उनके खाते से माफ किया जाएगा। सिंह ने कहा कि साथ ही सात लाख किसान और हैं, जिन्होंने कर्ज लिया था और उसका भुगतान नहीं कर सके, जिससे वह ऋण गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बन गया और उन्हें कर्ज मिलना बंद हो गया। ऐसे किसानों को भी मुख्य धारा में लाने के लिए उनके कर्ज का 5630 करोड रुपये माफ किया गया है। इस तरह कुल मिलाकर किसानों का 36,359 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है।
गेहूं किसानों को योगी का बडा सहारा
उत्तर प्रदेश के गेहूं किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने के महत्वपूर्ण कदम के तहत योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला करते हुए राज्य में पांच हजार गेहूं खरीद केन्द्रों के जरिए 80 लाख टन गेहूं की सीधी खरीद का फैसला किया। मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में तय किया गया कि राज्य भर में सरकार पांच हजार गेहूं खरीद केन्द्र बनाएगी। राज्य कैबिनेट बैठक के बाद उजार् मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि अभी तक पांच लाख टन और आठ लाख टन की खरीद होती थी। हमारी सरकार ने 80 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। चालीस लाख टन पहले चरण में और कुल लक्ष्य 80 लाख टन का रखा गया है।
गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य
शर्मा ने कहा कि किसानों को उनके गेहूं के लिए 1625 रूपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तो मिलेगा ही, उसके अलावा दस रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से ढुलाई और लदाई का भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारियों को आदेश जारी किये गये हैं कि अगर किसी जिले में किसानों की ज्यादा मांग है तो अविलंब उस जिले में खरीद केन्द्रों की संख्या बढायी जाए। सरकार सुनिश्चित करेगी कि सभी खरीद केन्द्रों पर पानी और पयार्प्त छाया की व्यवस्था हो।
किसान से होगी सीधी खरीद
किसान से उसके आधार कार्ड या अन्य ऐसे ही दस्तावेज के आधार पर सीधी खरीद की जाए। धन सीधा उसके खाते में जमा कराया जाए और बिचौलियों से किसान को मुक्ति मिले। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने आश्वस्त किया है कि खरीद केन्द्र पर किसी भी तरीके से किसान का उत्पीड़न नहीं होने देंगे।अवैध बूचड़खानों को लेकर यूपी सरकार किसी तरह का कोई समझौता नहीं करेगी। हालांकि लाइसेंस के लिए फिर से आवेदन करने वालों के लाइसेंस का नवीकरण किया जाएगा। कैबिनेट की पहली बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला किया गया। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि मैंने अवैध बूचड़खानों के संबंध में पहले भी काफी स्पष्टीकरण दिये हैं। इस संबंध में कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव रखा गया।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने इस बात पर मुहर लगायी कि जो अवैध बूचड़खाने चल रहे हैं, उन्हें बंद किया जाएगा। उस दिशा में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का जो आदेश है, उसे सरकार जस का तस मानेगी और इस बारे में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सिंह ने कहा कि जहां तक कुछ लोगों की ओर से लाइसेंस के लिए फिर से आवेदन करने का प्रश्न है, उनके आवेदन देखकर नवीकरण करने में कोई आपत्ति नहीं है।महिलाओं से छेड़खानी करने वालों पर अंकुश लगाने के मकसद से बने एंटी रोमियो स्क्वायड की कार्रवाई की उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सराहना की। उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया (भाजपा) सरकार बनने से पहले प्रदेश के अंदर नागरिकों विशेष रूप से महिलाओं, कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों में असुरक्षा का भाव रहता था। भय का वातावरण था। खासकर कॉलेज जाने वाली लडकियों में बहुत असुरक्षा थी। उन्होंने कहा, लगातार स्कूल जाने वाली बहनों का पीछा करना, अभद्र टिप्पणी करना, बाजार में अगर कोई बहन अपनी मां के साथ जा रही है तो मोटरसाइकिल से उसका पीछा करना जैसी घटनाएं होती थीं। एंटी रोमियो दस्ता अच्छा कार्य कर रहा है। पूरे प्रदेश से इस अभियान को वाहवाही मिली है।
शर्मा ने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि एंटी रोमियो दस्ता जब कार्रवाई को अंजाम देने के लिए निकलता है तो बडे अधिकारियों से ब्रीफिंग लेकर जाए। इस अभियान की प्रामाणिकता और हो, प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान को कुछ राजनीतिक पार्टियों ने बदनाम करने की कोशिश भी की है। उन्होंने बताया कि सभी पुलिस अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी किये गये हैं कि अगर कहीं कोई युगल किसी पार्क, सार्वजनिक स्थल, रिक्शे, कालेज में या किसी अन्य जगह बैठा है तो अनावश्यक रूप से उनसे पूछताछ करने, पहचान पत्र मांगने जैसी शिकायत मिलने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। शर्मा ने कहा, इस अभियान के पीछे किसी युवा का उत्पीडन ना हो बल्कि दोषी पर कठोर कार्रवाई हो, यही मकसद है।उत्तर-प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने खनन, उद्योग नीति तथा आलू किसानों की समस्याओं के निदान के लिए कैबिनेट की पहली बैठक में मंत्री समूहों और समिति के गठन का महत्वपूर्ण फैसला किया। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उपाय सुझाने के लिए मंत्री समूह बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य करेंगे। इसमें कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना और दारा सिंह बतौर सदस्य होंगे। समूह एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगा।
उन्होंने बताया कि किसानों को आलू की दिक्कत रहती है और उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मौर्य की अध्यक्षता में तीन लोगों की कमेटी बनायी गयी है जिसमें कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही और दारा सिंह भी हैं। मंत्रियों ने कहा, कमेटी इस बात का अध्ययन करेगी कि आने वाले समय में हम आलू पैदा करने वाले किसान को किस तरह राहत दे सकें।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में बड़ी तादाद में पूंजी निवेशकों को आकर्षित करने और उद्योग लगाने के मकसद से नयी उद्योग नीति बनाने का फैसला किया है ताकि राज्य के नौजवानों को नौकरी के लिए बाहर ना जाना पडे। शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक मंत्रिसमूह का गठन किया है जो अलग अलग राज्यों में जाकर वहां की उद्योग नीति की बारीकियों का अध्ययन करेगा और उत्तर प्रदेश में सिंगल विण्डो के माध्यम से एक अच्छी उद्योग नीति बन सके, इसके उपाय सुझाएगा।
समिति उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में होगी। इसमें कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, सतीश महाना, गोपाल दास नंदी और शर्मा बतौर सदस्य होंगे।उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय पिछडा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की पहली बैठक में इस आशय का धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री को भेजने का निर्णय लिया गया है। केन्द्र सरकार ने फैसला किया है। राष्ट्रीय पिछडा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करते हुए राज्य कैबिनेट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के माध्यम से धन्यवाद प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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