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सासाराम की सड़कें गड्ढा मुक्त हो गयी,टूरे-फूटे डीवाइडर रंग-रोगन से चकाचक हो गए,काश!सीएम अक्सर आते?

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अक्सर गंदगी से निकलने वाले सडांध के बीच जीने वाले शहर सासाराम की सड़कें गड्ढा मुक्त हो गयी. टूरे-फूटे डीवाइडर दुरुश्त होकर रंग-रोगन से चकाचक हो गए. जीटी रोड पर उजला लाइन खीचा गया. नगर पर्षद के सफाई कर्मियों की हड़ताल के बावजूद सड़क पर झाडू लगने लगे. आखिर हुआ क्या ? हैरत में पड़े शहर के लोग एक दुसरे से सवाल पर सवाल कर रहे हैं. जवाब है, यहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पधार रहे हैं. उन्हें दिखाना तो है कि यहाँ शासन का प्रशासन भी है. भले ही यह दो ही दिन के लिए क्यों ना हो.
सुबह के वक्त पोस्टऑफिस चौराहे पर मौजूद सेवानिवृत शिक्षक गोपाल जी को मानों सीएम के स्वागत में सज रहे शहर की टीस ने आक्रोशित कर दिया हो. कहते है, चाटुकारिता की हद हो गयी. इसी शहर में आज भी गाजराढ मोहल्ले में जाने के लिए घुटने भर जमा नाली के गंदा पानी से गुजरना पड़ता है. महकमे के बाबू से लेकर हाकीम तक की दौड़ नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गयी. निजी स्वार्थ में सड़क पर दुकाने लगवाने वाला महकमा ने कभी सोचा भी है कि लोग हर रोज लगने वाले जाम से निपटते कैसे हैं. दो दिनों के लिए चले हैं हाँ शासन का प्रशासन दिखाने. सातवें आसमान पर दिख रहे उनके आक्रोश की जद में यहाँ के लोग भी शामिल थे जिन्होंने अपने हक के लिए आवाज उठाना बंद कर दिया है.
सुबह के वक्त बुद्धिजीवियों के जमावड़े के केंद्र कहे जाने वाले पोस्ट ऑफिस चौराहा पर मिले सत्ताधारी दल के नेता रिंकू सिंह कहाँ चुप रहने वाले ठहरे. अपने प्रिय नेता नीतीश कुमार के बखान में उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहा कि समस्याओं से त्रस्त लोगों की आसपास कड़ी भीड़ से कैसे कैसे तीर चलेंगे. पर लोहा मानना पड़ेगा, ऐसे नेताओं का जो लोगों के हर व्यंग को आसानी से झेल लेते है. पर महसूस तो हुआ ही कि यहाँ के लोग नरक की जिन्दगी जी रहे हैं. उक्त नेता को मानना पड़ा कि नीतीश कुमार की नीतियाँ सही हैं पर उसे धरातल पर उतारने वाला तंत्र बेकाबू हो गया है. तंत्र में शामिल छोटे से लेकर बड़े लोग सिर्फ अपने स्वार्थ को प्रमुखता देते हैं. आम लोगों की समस्या सुलझा नहीं पाते.
आधिकारिक जानकारी के अनुसार शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री सासाराम आयेंगे. सर्किट हाउस में उनका ठहराव होगा. उनके साथ आने वाले अधिकारियों के लिए तमान सरकारी बंगलो बुक है. अच्छे होटल भी रिज़र्व रखे गए हैं. शाम में ही समाहरणालय स्थित डीआरडीए सभागार में अधिकारियों के साथ रोहतास, कैमूर व बक्सर की योजनाओं की समीक्षा करेंगे. 13 जनवरी की सुबह संझौली प्रखंड के सुसाड़ी गाँव में योजनाओं का भौतिक सत्यापन करेंगे और उसके बाद पटना वापस.

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