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शबाना आजमी का सुहाना सफर

बॉलीवुड, बॉलीवुड गैलरी, मनोरंजन

शबाना आजमी का नाम उन कुछ सितारों में शुमार होता है जो अपने आप को हर रोल में फिट कर लेते हैं। हिन्दी फिल्मों में अभिनेत्री शबाना आजमी ने कमोबेश हर तरह के रोल किये हैं। आज भी वह फिल्मों में सक्रिय हैं। एक अभिनेत्री होने के साथ-साथ शबाना आजमी सामाजिक कार्यों में भी अपना समान योगदान दे रही हैं। शबाना आजमी के 65वें जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।
शबाना आजमी का जन्म 18 सितंबर, 1950 को मशहूर लेखक और कवि कैफी आजमी के घर हुआ था। उनके एक भाई भी हैं…बाबा आजमी जो एक सिनेमेटोग्राफर हैं। शबाना आजमी का बचपन कलात्मक माहौल में बीता। पिता मशहूर शायर कैफी आजमी और मां रंगमंच अदाकारा शौकत आजमी के सान्निध्य में शबाना आजमी का सुहाना बचपन बीता। मां से विरासत में मिली अभिनय-प्रतिभा को सकारात्मक मोड़ देकर शबाना ने हिन्दी फिल्मों में अपने सफर की शुरुआत की।
शबाना आजमी ने मनोविज्ञान में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से ली है। शबाना आजमी ने एक्टिंग का कोर्स फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिटीयूट ऑफ इंडिया यानी एफटीआईआई, पुणे से किया है। एक्टिंग क्लास लेने के लिए उन्होंने “जया भादुड़ी” से प्रेरणा ली। शबाना आजमी ने 1973 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। उनकी पहली फिल्म थी श्याम बेनेगल की “अंकुर”। “अंकुर” जैसी आर्ट फिल्म की सफलता ने शबाना आजमी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अपनी पहली ही फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ।
इसके बाद 1983 से 1985 तक लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। ‘अर्थ’, ‘खंडहर’ और ‘पार’ जैसी फिल्मों के लिए उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया जो एक बेहतरीन अदाकारा के लिए सम्मान की बात है। शबाना आजमी ने 1973 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। उनकी पहली फिल्म थी श्याम बेनेगल की “अंकुर”। “अंकुर” जैसी आर्ट फिल्म की सफलता ने शबाना आजमी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अपनी पहली ही फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ।
इसके बाद 1983 से 1985 तक लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। ‘अर्थ’, ‘खंडहर’ और ‘पार’ जैसी फिल्मों के लिए उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया जो एक बेहतरीन अदाकारा के लिए सम्मान की बात है। 15 पार्क एवेन्यू और हनीमून ट्रैवेल्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी फिल्मों में उनका अभिनय नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों पर हावी रहा। नई पीढ़ी की अभिनेत्रियां इस सक्षम और कुशल अभिनेत्री के सानिध्य में अपनी अभिनय क्षमता निखारने की इच्छुक रहती हैं। पैतीस वर्ष के लंबे अनुभव के बाद भी शबाना आजमी की सक्रियता अभिनय की दुनिया में बनी हुई है। वे आज भी उसी ऊर्जा और जोश के साथ हिन्दी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं।
शबाना आजमी ने मशहूर लेखक जावेद अख्तर से शादी की है। जावेद पहले से शादी-शुदा थे लेकिन फिर भी शबाना के प्यार में उन्होंने तलाक ले कर शादी की। पति जावेद अख्तर के सक्रिय सहयोग ने शबाना आजमी के हौसले को बढ़ाया और वे फिल्मों में अभिनय के रंग भरने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक मंचों पर देश और समाज से जुड़ी अपनी चिंताएं अभिव्यक्त करने लगीं।

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