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लालू का पीछा नहीं छोड़ रही मुसीबत

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पटना। हिचकोले लेती बिहार की राजनीति में राजद का पाला लगातार डांवाडोल बना हुआ है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद एक मुसीबत से बाहर आते हैं तो दूसरी उन्हें घेर लेती है। कुछ दिन पहले बागी हुए राजद विधायकों को लालू ने एन-केन-प्रकारेण मनाया था लेकिन उनके फिर से दरार आने लगी है। रविवार को विधान परिषद में राजद विधायक दल के नेता गुलाम गौस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। गौस मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से जदयू के उम्मीदवार हो सकते हैं।

हालांकि गौस ने कहा कि इस मुलाकात में राजनीति से जुड़ी कोई बात नहीं हुई। वे उर्दू भाषी छात्रों को विशेष टीइटी परीक्षा में सहूलियत देने का मुद्दा उठाने गए थे। मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्री पीके शाही से उनकी बातचीत हुई थी। गौस ने राजद में हुए टिकट बंटवारे पर सवाल उठाया था। उनका विरोध इस बात पर है कि राजद ने छह मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया है। इनमें एक भी पिछड़ी और दलित मुस्लिम बिरादरी से नहीं हैं, जबकि इनकी आबादी 85 फीसद है। तीन दिनों के भीतर लालू प्रसाद ने उन्हें दो बार मनाने की कोशिश की। लेकिन, अब तक नाराज ही चल रहे हैं |

समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एनके सिंह रविवार को जदयू में शामिल हो गए। उनके अलावा पूर्व मंत्री बागी कुमार वर्मा, अररिया की जिला परिषद अध्यक्ष शगुफ्ता अजीम सहित अनेक नेताओं ने जदयू की सदस्यता ग्रहण की। एनके सिंह और बागी कुमार वर्मा ने पहले एक अणे मार्ग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष जदयू की सदस्यता ली। फिर दोनों नेता अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय आए जहां प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने पार्टी में उनका स्वागत किया। एनके सिंह सीबीआइ के निदेशक भी रह चुके हैं। उधर, जदयू के वरिष्ठ नेता व राज्य के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे के स्वरूप पर जमकर बिफरे। उन्होंने ऐन चुनाव के वक्त पार्टी में शामिल हुए लोगों को टिकट दिए जाने पर एतराज जताया। सिंह ने कहा कि उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी भावना से अवगत करा दिया है।

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