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मोदी ने कहा, अमेरिका हमारा स्वाभाविक वैश्विक सहयोगी

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अमेरिका को भारत का स्वाभाविक वैश्विक सहयोगी करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की पूरक शक्ति का उपयोग दुनिया भर में लोगों के जीवन में बदलाव लाने के उद्देश्य से समावेशी और व्यापक आधार पर विकास के लिए किया जा सकता है।
मोदी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के वैचारिक पृष्ठ पर लिखा, अमेरिका हमारा स्वाभाविक वैश्विक सहयोगी है। भारत और अमेरिका अपने साझा मूल्यों के स्थायी और सार्वभौमिक औचित्य को मूर्त रूप देते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीय़-अमेरिकी समुदाय का समृद्ध होना वास्तव में भारत-अमेरिका साझेदारी की अंतर्निहित शक्ति का एक लक्षण, उद्यम कौशल को विकसित करने वाले माहौल के लिए संभावना और कठोर परिश्रम का प्रतिफल है।
अपनी पांच दिवसीय अमेरिका यात्रा के लिए न्यूयार्क आगमन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एकदूसरे की सफलता में भारत और अमेरिका की मूलभूत हिस्सेदारी और कई साझा हित जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी साझेदारी की अनिवार्यता भी है और एशिया एवं प्रशांत महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा तथा स्थायित्व लाने की दिशा में इसका विशेष महत्व भी होगा, साथ ही आतंकवाद और चरमपंथ जैसे अपूर्ण और तत्काल हल किए जाने वाले आवश्यक कार्यों, हमारी समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा, साइबर क्षेत्र तथा बाहय अंतरिक्ष और वह सभी जिनका हमारे दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है।
मोदी ने लिखा, दुनिया भर में लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए भारत और अमेरिका की ताकत को समावेशी एवं व्यापक आधार पर प्रयोग किया जा सकता है। मोदी ने कहा, यह वैश्विक तौर पर गतियमान क्षण है। मैं दोनों देशों के भाग्य को लेकर आश्वस्त हूं क्योंकि लोकतंत्र परिवर्तन का सबसे बड़ा और यदि सही परिस्थिति में हो तो, मानव जाति को विकसित होने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि एक दूसरे के दृष्टिकोण के प्रति संवेदनशीलता और हमारी मित्रता के प्रति विश्वास के जरिए हम अपने समय की सबसे जरूरी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के अधिक समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास करने का अवसर पा सकते हैं।
मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने में तकनीक के योगदान को भी विशेष तौर पर रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आलेख में लिखा, सूचना तकनीक में हमारी सामथ्र्य विशेष तौर पर आज के डिजिटल युग में नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण है। हमारा कारोबारी सहयोग समान राजनीतिक प्रणाली और कानून के शासन के प्रति साक्षा प्रतिबद्धता और सहूलियत पर निर्भर करता है। शिक्षा, नवाचार और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए हमेशा प्रेरणा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 सितंबर को संबोधन और न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डेन में 28 सितंबर को 18,000 भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करने के बाद मोदी वाशिंगटन रवाना होंगे, जहां वे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से पहली बार 29 सितंबर और 30 सितंबर को व्हाइट हाउस में मुलाकात करेंगे।

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