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मापतौल के दोषी व्यवसायियों पर विधि सम्मत कार्रवाई जारी-कृषि मंत्री रामविचार राय

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बिहार के कृषि मंत्री रामविचार राय ने सोमवार को कहा कि मापतौल के 493 दोषी व्यवसायियों पर अदालत में मुकदमा दायर करने के लिए विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है. बिहार विधान परिषद में भाजपा सदस्य नवल किशोर यादव द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री रामविचार राय ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली दिनांक 22 जुलाई 2014 से पूरे राज्य में लागू की गयी है.
कृषि मंत्री ने कहा कि विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली में अन्तर्निहित प्रावधानों के तहत अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2016 के बीच राज्य के 38 जिलों में विभागीय पदाधिकारियों एवं निरीक्षकों द्वारा 21,844 दुकानों का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के क्रम में असत्यापित माप तौल उपकरणों का निश्चित अवधि में सत्यापन एवं अभिलेख उपस्थापित करने हेतु 8422 व्यवसायियों को नोटिस भेजे गये. जिसमें 6956 व्यवसायियों ने अपने माप तौल उपकरणों का सत्यापन एवं मुुहरांकन करा लिया.
रामविचार राय ने बताया कि 973 व्यवसायियों ने अपने सत्यापन प्रमाण पत्र का प्रदर्शन कार्यालय में आकर कराया एवं 493 दोषी व्यवसायियों पर अदालत में मुकदमा दायर करने के लिए प्रक्रिया के तहत विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि निरीक्षण के क्रम में प्रत्यक्ष दोषी पाये गये 75 व्यवसायियों के विरुद्ध जब्ती की कार्रवाई की गयी है. उन्होंने बताया कि बटखरा और तराजू का उपयोग करने वाले सभी कारोबारियों को इसका भौतिक सत्यापन कराने और क्रेताओं को लाभ दिलाने के लिए लगातार नियमाकूल कार्रवाई की जाती है.
भाजपा सदस्य रजनीश कुमार द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए राय ने बताया कि कृषि यांत्रिकीकरण राज्य योजना वर्ष 2016-17 अंतर्गत अबतक दो लाख पचपन हजार से अधिक ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसके विरुद्ध एक लाख सड़सठ हजार से अधिक स्वीकृति पत्र निर्गत किये जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि अबतक अनुदानित दर पर 57 हजार से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण किया जा चुका है तथा 41 करोड़ रुपये से अधिक अनुदान की राशि की निकासी कोषागार से हो चुकी है, जो संबंधित किसानों लाभुकों के बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेजा जा रहा है. यह कुल वित्तीय लक्ष्य का 24 प्रतिशत है.
राय ने कृषि विकास को बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल होना बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कृषि यांत्रिकीकरण योजना वर्ष 2016-17 में आवंटित राशि को समय सीमा के अंदर खर्च कर किसानों को अनुदान का लाभ देने के प्रति दृढ संकल्प है.
उल्लेखनीय है कि पूर्व में अनुदान की राशि छोड़कर शेष कीमत देने पर किसान को यंत्र उपलब्ध हो जाते थे, परंतु वर्तमान वर्ष 2016-17 में यंत्र का एकमुश्त कीमत चुकाने पर विक्रेता द्वारा यंत्र उपलब्ध कराया जाता है. तत्पश्चात अनुदान की राशि आरटीजीएस, एनइएफटी के माध्यम से किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जिसके कारण उपलब्धि कम है. सरकार द्वारा शत प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है.

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