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मांझी ने पासवान को भी महादलित में शामिल किया

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बिहार में चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच मांझी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के समानांतर एक और लंबी लकीर खींच दी है। शनिवार को राज्य मंत्रिमंडल ने महादलित जातियों में शामिल 22 अनुसूचित जातियों के विकास के लिए संचालित योजनाओं का लाभ दुसाध (पासवान) जाति को भी उपलब्ध कराने की सहमति प्रदान कर दी।
मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर दोपहर 12 बजे शुरू हुई मंत्रिमंडल की इस बैठक में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी समेत उनकी सरकार के सभी आठ मंत्री शामिल थे। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव बी प्रधान ने बताया कि बैठक में कुल आठ प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। अनुसूचित जाति में शामिल दुसाध जाति के लोगों को भी उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा, जो अब तक अनुसूचित जाति में शामिल 22 जातियों को महादलित समुदाय में शामिल करने के बाद मिल रहा था। मंत्रिमंडल के इस फैसले के बाद दुसाध जाति की दो उप जातियों (धाडी और धरही) को अब अन्य महादलित जातियों की तरह ही सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
मांझी सरकार ने सोशल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक और अहम फैसला लेते हुए अनुसूचित जनजाति के परिवारों के विकास के लिए सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पहुंचाने हेतु विकास मित्रों का चयन अनुसूचित जनजाति परिवारों से करने पर अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। इस फैसले से अब अनुसूचित जनजाति के बेरोजगार युवक-युवतियों का चयन भी विकास मित्र के रूप में किया जा सकेगा।
राजधानी पटना के शेखपुरा और जगदेव पथ के बीच निर्माणाधीन फ्लाईओवर के लिए मंत्रिपरिषद ने 321 करोड़, 39 लाख, 60 हजार रुपये के द्वितीय अनुमानित लागत को भी अपनी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस राशि से फ्लाईओवर के पहुंच पथ, रिटेनिंग वाल, सर्विस लेन, रोड जंक्शन, विद्युतीकरण एवं भूमि अधिग्रहण के लंबित कार्यों को पूरा किया जा सकेगा।
राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच मांझी कैबिनेट ने दरभंगा स्थित दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम बदलकर उसे फिर से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के नाम पर कर दिया है। अब यह संस्थान डॉ. जगन्नाथ मिश्र इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के नाम से जाना जाएगा। पूर्व में यह इंजीनियरिंग कॉलेज डॉ. मिश्र के नाम पर ही था, जिसे बाद में सरकार ने बदल दिया था।
उल्लेखनीय है कि दुसाध (पासवान) को छोड़ राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति में शामिल 22 जातियों को महादलित समुदाय में शामिल किया था, जबकि दुसाध जाति से आने वाले कई राजनेता पासवान को भी महादलित समुदाय में शामिल करने की मांग कर रहे थे। रामविलास पासवान ने तो इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया था।

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