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महागठबंधन में मुस्लिमों को नहीं मिली तरजीह

चुनाव, बिहार, विधान सभा

बिहार चुनावों में जेडीयू-राजद और कांग्रेस के महागठबंधन की ओर से हुई टिकटों की घोषणा में बेशक जातिगत व्यवस्‍था का पूरा ध्यान रखा गया लेकिन मुस्लिम वर्ग को इस बार ज्यादा तरजीह नहीं दी गई है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीटों की घोषणा में जहां ओबीसी को 55 फीसदी प्रतिनिधित्व मिला वहीं मुस्लिमों को मात्र 14 फीसदी। जबकि बिहार में मुस्लिमों की आबादी 16 फीसदी के करीब है। ऐसे में जनसख्‍ंया के अनुपात में भी महागठबंधन में मुस्लिमों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका।
कुछ यही हाल महिलाओं का भी रहा। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर हमेशा दावे करने वाले नीतीश कुमार भी सीटों के मामले में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिलवा सके। मात्र दस फीसदी टिकट ही महिलाओं के हिस्से में आए हैं।
महिलाओं को लेकर तीनों ही दलों का रवैया रुखा रहा और किसी ने भी उन्हें टिकट देने में दरियादिली नहीं दिखाई। जिन गिनी चुनी महिलाओं को टिकट मिले भी उनमें से ज्यादातर विधायकों या बड़े नेताओं की रिश्तेदार ही हैं।बिहार चुनावों के लिए नीतीश कुमार ने जो लिस्ट जारी की उसमें सबसे ज्यादा जलवा यादवों का रहा। तीनों पार्टियों ने कुल जमा एक चौ‌थाई टिकट यादवों को ही दिए। लालू यादव ने जहां 48 यादवों को टिकट दिया है वहीं नीतीश ने 14 और कांग्रेस ने दो यादव उम्‍मीदवारों को टिकट दिया है।
भूमिहारों और अगड़ी जातियों को टिकट देने के मामले में भी लालू ने कंजूसी बरती। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजद की ओर से किसी भूमिहार को टिकट नहीं दिया गया।हालांकि लालू और नीतीश ने मुस्लिमों को टिकट देने में बेशक दिल बड़ा न किया हो लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट देने में पूरी दरियादिली दिखाई है। लालू ने जहां 101 में से मात्र 15 मुस्लिमों को टिकट दिया है वहीं नीतीश ने मात्र 9 सीटों पर ही मुस्लिम उम्‍मीदवार उतारे हैं।जबकि इनके मुकाबले कांग्रेस ने 41 में से 9 सीटें मु‌स्लिमों को देकर अपने खोते जनाधार को वापस लाने का प्रयास किया है।

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