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महागठबंधन ने यादव-कुशवाहा पर लगाया दांव

चुनाव, बिहार, विधान सभा

बिहार चुनावों के लिए जेडीयू-राजद-कांग्रेस के महागठबंधन ने 242 सीटों पर उम्‍मीदवारों की घोषणा कर दी है। एक सीट की घोषणा बाद में की जाएगी। पटना में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्षों के साथ संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीटों के बंटवारे की घोषणा की।नीतीश ने बताया कि महागठबंधन में उम्मीदवारों को टिकट देते समय सभी वर्गों का ख्याल रखा गया है। जिसमें ओबीसी के 55 फीसदी, एससी एसटी के 16, सामान्य जाति को 14 फीसदी और मुस्लिम उम्‍मीदवारों को 14 फीसदी टिकट दिए गए हैं।उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन आगामी चुनावों में जीत दर्ज कर अपनी सरकार बनाएगा। लगे हाथ उन्होंने विरोधी एनडीए के घटक दलों पर भी निशाना साध दिया। कहा गठबंधन के सभी दल भाजपा के सामने नतमस्तक हो गए हैं। वहीं आरक्षण के मुद्दे पर सरसंघ चालक मोहन भागवत के बहाने भाजपा की भी आलोचना कर डाली।कहा भाजपा जिस तरह संघ के सामने घुटने टेक रही है उससे देश के लिए खतरनाक स्थिति हो सकती है। संघ प्रमुख द्वारा आरक्षण मुद्दे पर पांचजन्य में दिए इंटरव्यू को पढ़ते हुए नीतीश ने कहा कि जिस तरह से आरक्षण को खत्‍म करने के लिए भागवत विचार रख रहे हैं वो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।वहीं महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर सबसे बड़ा दांव चला है राजद सुप्रीमो लालू यादव ने जिन्होंने अपने हिस्से की 102 सीटों में से 48 पर यादव उम्‍मीदवारों को उतार कर बिहार की इस बड़ी आबादी को गोलबंद करने की कवायद शुरू कर दी है। लालू ने अपने दोनों बेटों तेजस्वी और तेज प्रताप को भी चुनावी मैदान में उतार कर अपनी राजनीतिक विरासत उन्हें सौंपने की तैयारी कर ली है।
दूसरी ओर जातिगत चक्रव्यहू को भेदने के लिए नीतीश ने भी थोक के भाव कुशवाहा दावेदारों को टिकट दिया है। चुनाव वितरण के दौरान उन्होंने लव-कुश समीकरणों का पूरा ख्याल रखा है।हालांकि यादवों को टिकट देने में उन्होंने भी पूरी दरियादिली दिखाई है नीतीश ने कुल 14 यादव उम्‍मीदवारों को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने अपने हिस्से की 41 सीटों में से 2 यादवों को टिकट दिया है।आज जारी हुई लिस्ट में लालू यादव ने अपने बेटे तेजस्वी को अपनी परंपरागत सीट राघोपुर से और तेज प्रताप को महुआ से टिकट दिया है।
तीनों पार्टियों द्वारा जारी की गई ‌लिस्ट को देखकर एक बात का साफ अंदाजा लग सकता है कि महागठबंधन के मुखिया नीतीश कुमार बेशक बिहार में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की बात करते हों लेकिन दांव एक बार फिर जातिगत समीकरणों पर ही लगाया गया है।थोक के भाव यादवों को टिकट दिया जाना इस बात का ही संकेत है। यही कारण है कि बिहार में भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले भूमिहारों को लालू यादव ने कोई टिकट नहीं दिया तो नीतीश और कांग्रेस ने भी नाममात्र के भूमिहारों को टिकट दिया है। वहीं इस सूची में कई मंत्रियों और वर्तमान विधायकों की भी छुट्टी कर दी गई है।

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