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महबूबा राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी

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जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के असामयिक निधन के बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती नई मुख्यमंत्री बनेंगी। पीडीपी ने राज्यपाल को अपने नए नेता के रूप में महबूबा के नाम का पत्र लिखा है। राज्य में गठबंधन सरकार में सहयोगी भाजपा ने भी महबूबा के नाम का समर्थन करने का फैसला किया है।भाजपा ने साफ कहा कि दोनों दलों के बीच गठबंधन सरकार के गठन के समय पीडीपी का मुख्यमंत्री स्वीकार किया गया था। इसलिए महबूबा के नाम का वह समर्थन करेगी। महबूबा राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी।
भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार बीते साल एक मार्च को अस्तित्व में आई थी। उस समय भाजपा ने पीडीपी मुख्यमंत्री तो स्वीकार किया था, लेकिन महबूबा के नाम का विरोध किया था। तब उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के नाम पर सहमति बनी थी। मुफ्ती की वरिष्ठता व अनुभव को देखते हुए भी भाजपा ने उनका नेतृत्व स्वीकार किया था। इसके बाद बीते दो-तीन महीने से मुफ्ती मोहम्मद की अस्वस्थता के कारण उन्होंने खुद ही महबूबा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा नेताओं ने बात की थी, लेकिन महबूबा के कट्टरवादियों के प्रति नरम रुख रखने से भाजपा को उनके नाम पर आपत्ति थी।
भाजपा के जम्मू कश्मीर के प्रभारी अविनाश राय खन्ना का कहना है कि मुफ्ती के रहते अलग बात थी, अब जब वे नहीं है तो अलग तरह से सोचना होगा। भाजपा को अफ्सपा, अनुच्छेद 370 व स्वायत्तता के मुद्दे पर महबूूबा के रुख से गहरी आपत्ति रही है, लेकिन अब हालात बदले हुए हैं। पीपीडी अब पूरी तरह से महबूबा के हाथ में है और पाकिस्तान के साथ रिश्तों से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात में भाजपा के लिए अपने मुख्यमंत्री की बात करना भी मुनासिब नहीं है। ऐसे में जम्मू कश्मीर में अपने गठबंधन वाली सरकार के लिए उसके पास महबूबा को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है।
भाजपा ने संकेत दिए हैं कि महबूबा के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नई सरकार के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं आएगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीडीपी और भाजपा के पास जो विभाग हैं वे वैसे ही रहेंगे। भाजपा की तरफ से सरकार के चेहरे भी जस के तस रहेंगे। जम्मू-कश्मीर की 87 सदस्यीय विधानसभा में पीडीपी ने 28 सीटें और भाजपा ने 25 सीटें जीती थीं। वहीं नेशनल कान्फ्रेंसको 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं।
चुनौतियां
– राज्य में कट्टरपंथियों खासकर हुर्रियत नेताओं को संयत रखना
– अनुच्छेद 370 व आफ्सपा के विवादित मुद्दों से सरकार को बचाना
– भाजपा के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना
– पीडीपी के अंदरूनी मामलों व अपने ही नेताओं का विरोध
– राज्य की स्वायत्तता के मुद्दे पर भाजपा के साथ सहमति बनाना
– कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के मुद्दे को सुलझाना
महबूबा की राजनीति
– 1959 में 22 मई को महबूबा का जन्म अनंतनाग में हुआ। कश्मीर विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी किया है।
– 1996 में तेजतर्रार नेता की छवि वाली महबूबा ने अपने पिता के साथ कांग्रेस में शामिल होकर अपने राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी।
– 37 साल की उम्र में उन्हांेने बिजबेहड़ा से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था।
– 1998 में महबूबा ने लोकसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर अपने पिता की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।
– 56 साल की तलाकशुदा महबूबा दो बेटियों की मां हैं और फिलहाल वे जम्मू कश्मीर की सबसे बड़े दल पीडीपी की अध्यक्ष हैं।
– 2004 में महबूबा ने दक्षिण कश्मीर से पहली बार लोकसभा चुनाव जीता।
– 2008 में शोपियां के वाची खंड से विधायक का चुनाव जीता
– 2014 में दक्षिण कश्मीर के अनंत नाग से लोकसभा का चुनाव जीता।
महबूबा की बड़ी बेटी इर्तिका न्यूयार्क में बतौर स्क्रीन राइटर काम करती हैं जबकि छोटी बेटी इल्तिजा लंदन में इंडियन हाईकमिशन में कार्यरत हैं। उन्होंने कश्मीर के बाद लंबा समय दिल्ली में भी गुजारा है।

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