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बॉम्बे हाईकोर्ट न्यायालय ने बार-बार बलात्कार के दोषी को मौत की सजा का प्रावधान बरकरार रखा

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बार-बार बलात्कार के दोषी को उम्रकैद या मौत की सजा देने के लिए आईपीसी की धारा में किए गए संशोधन की संवैधानिकता की सोमवार को पुष्टि की. न्यायमूर्ति बी. पी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे ने शक्ति मिल्स सामूहिक बलात्कार कांड के तीन दोषियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. तीनों ने आईपीसी की उस धारा की संवैधानिकता को चुनौती दी थी जिसके तहत उन्हें 2014 में मौत की सजा सुनाई गई.
उम्रकैद या सजा-ए-मौत का प्रावधान
भारतीय दंड सहिता की धारा 376 (ई) में संशोधन के तहत बार-बार बलात्कार का अपराध करने वाले दोषी को उम्रकैद या मौत की सजा हो सकती है. दिल्ली में 2012 में 23 वर्षीय छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के बाद यह संशोधन हुआ था. अदालत ने कहा,हमारा विचार है कि आईपीसी की धारा 376 (ई) संविधान के दायर से बाहर नहीं है इसलिए मौजूदा मामले में उसे खारिज नहीं किया जाएगा.

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