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बिहार की तीसरी कृषि विकास योजना पर 1. 54 लाख करोड़ होंगे खर्च : नीतीश

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिये तीसरी वृहत योजना (रोडमैप) (2017-22) का मुख्य लक्ष्य किसानों की आमदनी बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि इसके तहत पांच वर्ष में 12 विभागों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं पर 1. 54 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे.
पटना के सम्राट अशोक कॉन्वेंशन केंद्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कृषि क्षेत्र के विकास के लिये तीसरी वृहत योजना का शुभारंभ किया. इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा, तीसरे कृषि रोडमैप का लक्ष्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना है, इसके लिए हर क्षेत्र में काम किया गया है. किसान का मतलब सिर्फ खेत का मालिक नहीं बल्कि खेती के कार्य से जुड़े हुए सभी लोग हैं. 76 प्रतिशत लोग बिहार में आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है. इतनी बड़ी आबादी का आमदनी बढ़ जाने से राज्य समृद्ध बनेगा. कृषि रोडमैप का एक लक्ष्य यह भी है कि हर देश की हर थाली में एक बिहारी व्यंजन अवश्य हो.
नीतीश कुमार ने कहा, हमारे यहां शाही लीची, भागलपुर का जर्दालु आम, दीघा का दुधिया मालदह आम सब अपने आप में विशिष्ट है. सभी क्षेत्रों में काम करना है, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पांच वर्ष में 12 विभाग विभिन्न योजनाओं पर 1 लाख 54 हजार करोड़ रुपये खर्च करेंगे. उन्होंने कहा, किसानों को सहायता देने के लिए हमलोग कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहे हैं, सब्सिडी दे रहे हैं. स्थानीय स्तर पर कृषि यंत्र के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहित करना चाहते हैं. दूध, मछली, अंडा के उत्पादन में आत्मनिर्भर होकर, इसे दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचाया जायेगा. इसके लिये बिहार के खेत और किसान दोनों उपयुक्त हैं.
मुख्यमंत्री कहा, धान, गेहूं, मक्का में तो हम आगे हैं ही, सब्जी के उत्पादन में हमारा तीसरा स्थान है. जल्द ही हम दूसरे नंबर पर होंगे. हमारा लक्ष्य सब्जी उत्पादन में पहले स्थान पर आने का है. उन्होंने कहा, इस कृषि रोडमैप के जरिये हम जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहते हैं. गंगा के किनारे जैविक कारिडोर बनाया जायेगा, जिसमें सब्जी की खेती की जायेगी और इसके लिए कच्चे माल पर सब्सिडी भी सरकार देगी. गंगा की अविरलता और निर्मलता के प्रति हमलोग सतर्क हैं. जल शोधन संयंत्र से निकले पानी को और शोधित कर उसको सिंचाई के काम में लाया जायेगा.
नीतीश कुमार ने कहा कि बीजों के लिए हमारी दूसरे राज्यों पर निर्भरता रहती थी. अब इसके समाधान के लिए हमलोगों ने बीजों के रखरखाव हेतु सही तापमान की व्यवस्था, भंडारण और विपणन के उपाय किये हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई की बेहतर बनाने के लिए सिंचाई विभाग को अंदरुनी तौर पर दो हिस्सों में बांटा गया है. एक हिस्सा बाढ़ नियंत्रण का काम देखेगा और दूसरा हिस्सा सिंचाई परियोजनाओं को देखेगा.
सीएम ने कहा, किसानों के लिए सहकारी समिति बनायी जायेगी, जिसमें किसानों के आधारभूत संरचना का विकास किया जायेगा. सहकारी समिति के माध्यम से किसान उत्पादन, प्रसंसकरण एवं विपणन बेहतर तरीके से कर सकेंगे. इस अवसर पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि आज का दिन बिहार के इतिहास का यादगार दिन है. समारोह को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने भी संबोधित किया.

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