Comments Off on जैसे चाहो, वैसे मिलेंगे कृष्ण 11

जैसे चाहो, वैसे मिलेंगे कृष्ण

विडियो

लोग अकसर कृष्ण पर अनगिनत स्त्रियों से प्रेम रचाने पर सवाल उठाते हैं। लेकिन कृष्ण हमेशा से ब्रह्मचारी थे। ब्रह्मचर्य का अर्थ होता है ईश्वर के बताए रास्ते पर चलना। भले ही आप किसी भी संस्कृति या धर्म से ताल्लुक रखते हों, उन्होंने हमेशा यही बताया है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है – सबको अपने साथ शामिल करना।
अगर आप अभी इस अवस्था तक नहीं पहुंचे हैं और वहां पहुंचना चाहते हैं तो सही मायने में आप ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं। आप ‘मैं’ और ‘तुम’ में कोई फर्क नहीं करना चाहते। अगर आप किसी को ‘दूसरा इंसान’ की तरह देखते हैं तो यह अंतर साफ जाहिर होता है। शारीरिक संबंधों के मामले में ‘मैं’ और ‘तुम’ का फर्क बहुत गहराई से जाहिर होता है। इसी वजह से एक ब्रह्मचारी खुद को उससे दूर रखता है, क्योंकि वह अपने अंदर ही सबको शामिल कर लेना चाहता है।
कृष्ण में शुरू से ही सब कुछ अपने भीतर शामिल कर लेने का गुण था। बालपन में अपनी मां को जब यह दिखाने के लिए उन्होंने मुंह खोला था कि वह मिट्टी नहीं खा रहे हैं (उनकी मां ने उनके मुंह में सारा ब्रह्मांड देखा था) उस समय भी उन्होंने अपने अंदर सब कुछ समाया हुआ था। जब वे गोपियों के साथ नाचते थे, तब भी उनमें सब कुछ समाया हुआ था।
उन्होंने कहा भी है – ‘मैं हमेशा से ही ब्रह्मचारी हूं और हमेशा उसी मार्ग पर चलूंगा। अब मैंने बस एक औपचारिक कदम उठाया है। मेरे साथ अभी भी कुछ नहीं बदला है, बस परिस्थिति बदली है।’
वे जहां भी जाते, स्त्रियां उनके लिए पागल हो उठती थीं, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सुख के लिए किसी स्त्री का फायदा नहीं उठाया, एक बार भी नहीं। उनके नीले जादू ने लोगों को पागल बना दिया था। कृष्ण को इसमें बड़ा मजा आता था, लेकिन उन्होंने अपने इस जादू का कभी दुरुपयोग नहीं किया।
वह बस यही सोचते थे कि लोगों को कैसे ऊपर उठाया जाए। वे लोगों को प्रेम करने के लिए प्रेरित तो करते थे, लेकिन साथ ही यह कोशिश भी करते थे कि लोग उस प्यार को एक सही दिशा दे सकें, जिससे वह उनके लिए लाभकारी हो सके। वह यह नहीं चाहते थे कि लोगों के मन में निराशा और ईर्ष्या आए कि वे उन्हें पा नहीं सके। उनके जीवन में न जाने कितनी ही ऐसी स्थितियां आईं, जब उन्होंने एक स्त्री के स्नेह को ज्यादा सकारात्मक और उपयोगी बनाने के लिए उसे दूसरी दिशा देने की कोशिश की, ताकि वह अपने प्रेम को मात्र एक शारीरिक इच्छा न समझे और खुद को एक उच्च संभावना में रूपांतरित कर सके। उनकी इस कोशिश का एक उदाहरण राजकुमारी रुक्मिणी भी थीं।
हम उन महिलाओं की बात कर रहे हैं, जो कृष्ण के जीवन में आईं, चाहे वह उनकी पत्नी हों, गोपियां हों या कोई और स्त्री। कृष्ण हमेशा कहते थे कि जब मैं किसी महिला से मिलता हूं तो यह मैं उसी पर छोड़ देता हूं कि वह मेरी मां बनना चाहती है, बहन बनना चाहती है, प्रेमिका बनना चाहती है या पत्नी।
तो अनगिनत स्त्रियां अपनी-अपनी भावनाओं के मुताबिक कृष्ण से प्रेम करती थीं, लेकिन कृष्ण किसी के साथ नहीं उलझे। वे पानी में कमल की तरह निर्लिप्त थे। उनकी सोलह हजार रानियां होने का मतलब यह है कि जिस किसी स्त्री ने उनको एक पत्नी के रूप में प्रेम किया, उन्होंने उसे रानी का सम्मान दिया।

Back to Top

Search