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जैविक खाद के उपयोग से ही बढ़ेगी खेतों की उर्वराशक्ति

कृषि / पर्यावरण, बिहार

प्रखंड के चैनपुर मुबारकपुर में रविवार को आयोजित एक दिवसीय स्वरोजगार प्रशिक्षण में जिले के करीब दर्जनभर किसानों ने प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.आरके मंडल के नेतृत्व में बगवानी मिशन के तहत किया गया। यहां दर्जन भर किसानों को खेती करने की तकनीकी एवं कृषि से संबंधित स्वरोजगार को लेकर प्रशिक्षण दिया। वही विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने खेती की उर्वरा शक्ति बचाने को लेकर जैविक खाद्य के उपयोग करने के दिशा में किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने जल शक्ति अभियान के तहत जल संचय करने का तकनीकी भी बताया। उन्होंने किसानों को मशरूम दलहन व मधुमक्खी पालन की तकनीक बताई। प्रशिक्षण के दौरान मुबारकपुर में लगाए गए बायो फ्लॉक की जांच करने कोलकाता से पहुंचे बायो फ्लॉक टेक्नीशियन वैज्ञानिक श्रीजीत बनर्जी ने बायो फ्लॉक की जांच की व प्रशिक्षण में जिले के कोने-कोने से आए दर्जनों किसानों को बायोफ्लाेक टेक्नीशियन की विस्तृत जानकारी दी।
आठ दिनों के अंदर ही देखी गई मांगूर में बेहतर वृद्धि
वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान अपने घरों में छत के ऊपर टैंक लगाकर मछली पालन कर सकते हैं और बायो फ्लॉक के जरिए लाखों की आय कर सकते हैं। उन्होंने मुबारकपुर गांव निवासी महंत योगेंद्र दास के कैंपस में लगाए गए बायो फ्लॉक टैंक की जांच की व डाले गए मछली का वजन भी किया। बता दें कि 8 दिनों के अंदर एक किग्रा में 230 पीस देसी मांगुर डाले थे, जबकि वजन के बाद इतने ही वजन में मांगूर में केवल 90 पीस तौले गए। जिसे देख दर्जनों किसान चकित रह गए। वैज्ञानिक ने बताया कि यह ऑर्गेनिक चारा का कमाल है।

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