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चैती दुर्गा पूजा का कलश स्थापन आज, इसबार हाथी पर देवी का आगमन व नौका पर प्रस्थान

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वाराणसी। वासंतिक नवरात्र का श्रीगणेश इस बार 31 मार्च यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हो रहा है। भगवती की आराधना का यह व्रत पर्व पूरे नौ दिन का होगा। खास यह कि आठ अप्रैल को रामनवमी पुष्य नक्षत्र में मनाई जाएगी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का त्रेता में जन्म पुष्य नक्षत्र और कर्क लगन में ही हुआ था।
पुष्य नक्षत्र आठ अप्रैल को रामनवमी पर सुबह 9.58 बजे लग रहा है जो दशमी को दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा। आठ की दोपहर कर्क लग्न में भगवान का जन्मोत्सव विधि विधान और व्रतपूर्वक मनाया जाएगा। ऐसे में इस बार रामजन्मोत्सव का विशेष महत्व माना जा रहा है। इससे पहले 31 मार्च को घट स्थापन संग नौ दिनी देवी की आराधना व व्रत पर्व शुरू होगा। ज्योतिर्विद पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार सुबह 8.09 से 10.5 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 11.36 से 12.25 बजे तक कलश स्थापना, ध्वज रोहण व वर्षपति पूजन से किया जाएगा।
अंतिम दिन आठ अप्रैल को दुर्गा नवमी और रामनवमी एक साथ मनाई जाएगी। पारणा नौ अप्रैल दशमी को होगा।
देश व समाज के लिए सुखद संकेत – भगवती का आगमन इस बार हाथी पर हो रहा और नौका पर प्रस्थान। हालांकि आगमन ठीक नहीं लेकिन नौका पर प्रस्थान देश और समाज के लिए शुभ माना जाता है। राजनैतिक स्थिरता के लिए भी इसे अच्छा माना जा रहा है।
नवसंवत्सर 2071, नाम प्लवंग – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 31 मार्च को ही नवसंवत्सर 2071 का शुभारंभ हो रहा है। इसे प्लवंग के नाम से जाना जाएगा। माना जाता है कि इसी तिथि से सतयुग का आरंभ हुआ था। साथ ही इसी तिथि से नववर्ष का जन्म होता है इसलिए इस दिन नए संवत की कुंडली बनाकर पूरे साल का भविष्य बताया जाता है जिसमें साल के पर्व, त्योहार, ग्रहण का आकलन होता है। इस दिन वर्ष फल श्रवण का महत्व है।

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