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कैसा हो आपका स्टडी रूम

स्पेशल रिपोर्ट

बोर्ड की परीक्षाएं सिर पर हैं। मेडिकल से लेकर इंजीनियरिंग तक की प्रतियोगी परीक्षाएं भी आने वाले महीनों में होने वाली हैं। ऐसे में न केवल छात्रों बल्कि अभिभावकों पर भी दबाव काफी अधिक है। हर अभिभावक की कल्पना रहती है कि उसका बच्चा मेधावी हो। उसे परीक्षाओं में न केवल अच्छे अंक मिले बल्कि वह हर प्रतियोगिता में अन्य बच्चों से आगे रहे। इसके लिए अभिभावक हर तरह की सुविधाएं और संसाधन जुटाने की भी कोशिश करते हैं लेकिन हताशा तब होती है जब सारे प्रयासों के बाद भी बच्चे में अपेक्षित परिणाम नहीं हासिल कर पाते।कुछ बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है और वे जो कुछ पढ़ते है, वह शीघ्र ही भूल जाते हैं या फिर अधिक परिश्रम करने के बावजूद भी परीक्षाफल सामान्य ही रहता है। वास्तुविद् मानते हैं कि इसके पीछे आपके बच्चे के स्टडी रूम का वास्तुदोष भी हो सकता है। हम वास्तुविद पंकज कुमार जैन और अमिताभ गौड़ से बातचीत के आधार पर कुछ ऐसे टिप्स यहां दे रहे हैं जिनकी मदद से आप अपने बच्चे के अध्ययन पर सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
1.घर में अध्ययन कक्ष ईशान कोण अथवा पूर्व या उत्तर दिशा में बनवाना चाहिए। अध्ययन कक्ष शौचालय के निकट किसी भी कीमत पर न बनवाएं।
2. पढ़ने की टेबल पूर्व या उत्तर दिशा में रखें तथा पढ़ते समय मुंह उत्तर या पूर्व की दिशा में होना चाहिए। इन दिशाओं की ओर मुंह करने से सकारात्मक उर्जा मिलती है जिससे स्मरण शकित बढ़ती है एंव बुद्धि का विकास होता है।
3. जिस कमरे में बच्चा पढ़ता है उसे आग्नेय कोण यानी पूर्व और दक्षिण व वायु कोण अर्थात् उत्तर व पश्चिम दिशा में बिलकुल भी नहीं होना चाहिए। आग्नेय कोण में होने से बच्चा चिड़चिड़ा होता है और वायु कोण में पढ़ने से उसका मन भटकता है। अतः कोशिश करें कि बच्चा कम से कम परीक्षा के दिनों में पूर्व दिशा में ही बैठकर पढ़े।
4-बीएड, प्रशासनिक सेवा, रेलवे आदि की तैयारी करने वाले छात्रो का अध्ययन कक्ष पूर्व दिशा में होना चाहिए। क्योंकि सूर्य सरकार एंव उच्च पद का कारक तथा पूर्व दिशा का स्वामी है।
5-बीटेक, डाक्टरी, पत्रकारिता, ला, एमसीए, बीसीए आदि की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों का अध्ययन कक्ष दक्षिण दिशा में होना चाहिए । क्योंकि मंगल दक्षिण दिशा का स्वामी है।
6-एमबीए, एकाउन्ट, संगीत, गायन, और बैंक की आदि की तैयारी करने वाले छात्रों का अध्ययन कक्ष उत्तर दिशा में होना चाहिए क्योंकि बुध वाणी एंव गणित का संकेतक है एंव उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है।
7- रिसर्च तथा गंभीर विषयों का अध्ययन करने वाले छात्रों का अध्ययन कक्ष पशिचम दिशा में होना चाहिए क्योंकि शनि एक खोजी एंव गंभीर ग्रह है तथा पश्चिम दिशा का स्वामी है।
8- पढ़ाई की टेबल जिसे हम स्टडी टेबल भी कहते हैं उसका आकार गोलाकार, आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए। यदि टेबल का आकार तिरछा या टूटा हुआ होगा तो इससे बच्चा अपनी पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाएगा और भ्रमित होगा।
9- बच्चों के स्टडी रूम की दीवारों का कलर पीला या वायलेट होना चाहिए। इसी तरह कुर्सी और टेबल का रंग भी होना चाहिए।
10- विद्यार्थियों को अपने कक्ष के द्वार पर नीम की डाली लगानी चाहिए। इससे सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है।

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