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केंद्र ने मानी OROP की मांग, शर्तों पर भड़के पूर्व सैनिक

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केंद्र सरकार ने बीते 2 महीने से जंतर मंतर पर ‘वन रैंक, वन पैशन’ (OROP) की लड़ाई लड़ रहे पूर्व सैनिकों की मांग मान ली है। रक्षामंत्री मोहन पर्रिकर ने बताया कि OROP की समीक्षा हर पांच साल पर होगी और 2013 को OROP का आधार वर्ष माना जाएगा।
पर्रिकर ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने OROP के लिए केवल 500 करोड़ रुपए दिए थे लेकिन इसमें शुरुआती खर्च 8 से 10 हजार करोड़ रुपए तक का आएगा। उन्होंने कहा कि हर 5 साल पर पेंशन रिवाइज की जाएगी।
उन्होंने कहा कि 4 दशक से चली आ रही इस मांग को सरकार ने मान लिया है। OROP के तहत यह फैसला लिया गया है कि सैनिक विधवाओं को एकमुश्त एरियर दिया जाएगा, वहीं बाकियों 4 किश्तों में एरियर भुगतान किया जाएगा।
पर्रिकर ने कहा कि VRS लेने वाले सेना के जवानों को OROP के अंतर्गत उसका लाभ नहीं दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस मामले में रिव्यू के लिए ज्यूडिशियल कमेटी बनाई जाएगी जो 6 महीने में अपनी रिपोर्टसतबीर सिंह ने प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि हम सरकार के एलान से संतुष्ट हैं लेकिन सरकार ने केवल 1 मांग मानी है लेकिन बाकी की 6 मांगों पर खास गौर नहीं किया।
उन्होंने कहा कि 5 साल में समीक्षा का फैसला उन्हें मंजूर नहीं है और वे सरकार से VRS पर सफाई मांगेंगे।
उनका कहना है कि सेना में प्रमोशन न मिल पाने की वजह से 40 प्रतिशत सैनिक VRS ले लेतें हैं इसलिए यह फैसला सही नहीं है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि सरकार ने जुलाई 2014 से OROP की बात कर रही है लेकिन सैनिकों की मांग है कि अप्रैल 2014 से इसे लागू किया जाए।
पूर्व सैनिकों ने सरकार के ज्यूडिशियल कमेटी पर कहा कि न्यायिक आयोग में हमारा सदस्य हो और यह रिपोर्ट 6 महीने में न आकर 1 महीने में आए। देगी।

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