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कुंदरू की उत्पत्ति भारत से ही हुई है

कृषि / पर्यावरण

कुंदरू की उत्पत्ति भारत से ही हुई है। यह गर्म जलवायु में दो फसल एक वर्ष में देता है। आपके क्षेत्र में अच्छा कुंदरू होता है। आप निम्न तकनीकी अपनायें।
1. लगाने का समय जून-जुलाई या फरवरी-मार्च।
2. इसके लिये हल्की बालुई भूमि उपयोगी होती है।
3. इसका प्रवर्धन लता से होता है। ट्यूवर्स के द्वारा लता बनाई जा सकती है।
4. रोपणी हेतु 25-30 से.मी. लम्बी उंगली के बराबर मोटी कलम उपयोगी होगी।
5. 30&30&30 लम्बे, चौड़े, गहरे गड्ढे में खाद भरकर तैयार रखें। पौधशाला में लगाई कलमों को जड़ विकास होते ही मुख्य खेत में रोपें।
6. पौध से पौध, कतार से कतार दूरी 3 मीटर रखी जाये।
7. 130 किलो यूरिया, 250 किलो सिंगल सुपर फास्फेट तथा 50 किलो म्यूरेट आफ पोटाश प्रति हे. की दर से डालें।
8. रोपाई के समय आधा यूरिया पूरा स्फुर+पोटाश डालें।
9. शेष यूरिया 4 भागों में बराबर बांट कर जून से जुलाई के मध्य डालें।
10. उन्नत जातियां लतिका, निर्मल 21, नम्रता, गौरव, जी.एम 21 इत्यादि लगायें।

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