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आरएलडी-जेडीयू-बीएस फोर ने किया गठबंधन, सपा प्रमुख पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप

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आखिरकार राष्ट्रीय लोकदल, जनता दल (युनाईटेड) और बीएस-फोर के गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो गई है। औपचारिक घोषणा करने के लिए सोमवार को राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश कार्यालय पर रालोद के मुखिया चौधरी अजित सिंह महासचिव जयंत चौधरी, जनता (यू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव और राष्ट्रीय महासचिव के.सी.त्यागी मौजूद रहे।
बीएस-फोर के नेता आर.के.चौधरी इसमें शामिल नहीं थे, लेकिन गठबंधन की घोषणा के समय उन्होंने अपना नुमाइन्दा भेज दिया था। ये तीनों दल 2017 का यूपी का विधानसभा चुनाव तो लड़ेंगे ही साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव में भी साथ रहने का वादा किया।
सपा प्रमुख पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
परेस कांफ्रेंस में गठबंधन की औपचारिक घोषणा के दौरान सभी नेताओं ने सपा प्रमुख को ही निशाने पर रखा और उन पर गठबंधन में शामिल न होने को लेकर वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
नेताओं ने कहा कि मुलायम न तो विलय चाहते हैं और न ही गठबंधन। फिर आखिर क्या चाहते हैं? चौधरी अजित सिंह ने कहा कि 5 नवम्बर को सपा के रजत जयंती समारोह के तुरन्त बाद स्वयं सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने सांप्रदायिक शक्तियों से लड़ने के लिए चौधरी चरण सिंह व लोहिया के विचारों वाले दलों के साथ गठबंधन करने का लिखित प्रस्ताव किया था। जिस पर जद यू के शरद यादव और इंडियन नेशनल लोकदल के अभय चौटाला ने गठबंधन पर सहमति जताते हुए हस्ताक्षर किए थे।
दो दिन बाद मुलायम ने गठबंधन से ही इनकार कर दिया और सपा में दलों के विलय की बात कही। बिहार चुनाव में भी विलय के लिए मुलायम की मानी थी सारी शर्तेंजद यू के शरद यादव और केसी त्यागी ने कहा कि बिहार चुनाव से पहले भी हमने विलय के मुद्दे पर सपा प्रमुख की सारी बातें मान ली थीं कि पार्टी का नाम समाजवादी पार्टी होगा, चुनाव चिन्ह साइकिल ही रहेगा और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष भी वह स्वयं (मुलायम सिंह) रहेंगे लेकिन वहां भी ऐन मौके पर मुलायम मुकर गए।
रालोद जद यू नेताओं ने कहा कि हमारा तो गठबंधन हो गया, अब अन्य छोटे दलों से भी बातचीत जारी है। गठबंधन का नाम और सीटों के बारे में आगे बातचीत की जाएगी।

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